वो बारिश की पहली बूँदें , गिरी जब मेरे गालों पर |
नाच उठा मन - मयूर , बादलों के गर्जन पर |
ग्रीष्म के थपेड़ों से ग्रस्त , प्यासा था हरेक मन |
बारिश की 'मीठी' बूंदों से हर्षाया तन मन ||
टप टप गिरती बूंदों से बढ़ता जाता मेरा उल्लास |
पावस की पहली छुअन का , पुलकन भरा अहसास |
यादें हुई ताज़ा पानी से लबालब घर के चौक की |
तरंग दौड़ गयी कागज़ की नाव तैराने के शौक की ||
कमीज़ खोलकर बारिश में सरपट दौड़ जाने की चाह |
नंगे बदन पर गिरती ठंडी बूंदों की चुभन की आह |
पाकर ठंडक हुआ मुदित उल्लसित अंतर्मन |
वो बारिश की पहली बूँदें , भीगा गयी मेरा तन मन ||
kaafi acchi hai :)
ReplyDeletejagjit da ki yaad aagai....
ReplyDeletewoh kagaz ki kishti woh barish ka paani .... ghar ki yaad aagai re.... gaanv khet khalihaan :) aur hamara barish mein bhara hua makaan :)