शहर की चकाचौंध से कोसों दूर,
निर्मल अति सुन्दर हमारे प्यारे गाँव |
जीवन की धुरि, देश के पोषक नूर,
सांस्कृतिक सुगंध से महकते हमारे प्यारे गाँव ||
कुए की पाल पर पानी भरती पनिहारी,
खेतों में पसीने की बूंदों से महकते किसान |
मिटटी को आकार देती चाक चलाती कुम्हारी,
जीवंत और सुहासित गाँव, हमारे देश के प्राण ||
समरसता से मिल जुल कर रहते नर नारी,
पेड़ों पर उछल कूद करते बालक नादान |
हरे भरे खेतों से लिपटी वसुधा की महिमा न्यारी,
कितना सुन्दर गाँवों का जीवन प्राणवान ||
हरी भरी भूमि पर चरती गैया प्यारी,
क्रीडा करते बच्चों से जीवंत खेल मैदान |
घर की दीवारों से आती गोबर की महक न्यारी,
गाँवों का जीवन ऐसा अद्भुत स्वर्गिक महान ||
I have never been to a gaon...
ReplyDeleteitni adbhut jhalak dikhane ke liye dhanyavaad ;)
awesome.. \m/