Wednesday, January 12, 2011

हमारे गाँव

शहर की चकाचौंध से कोसों दूर,
निर्मल अति सुन्दर हमारे प्यारे गाँव |
जीवन की धुरि, देश के पोषक नूर,
सांस्कृतिक सुगंध से महकते हमारे प्यारे गाँव ||

कुए की पाल पर पानी भरती पनिहारी,
खेतों में पसीने की बूंदों से महकते किसान |
मिटटी को आकार देती चाक चलाती कुम्हारी,
जीवंत और सुहासित गाँव, हमारे देश के प्राण ||

समरसता से मिल जुल कर रहते नर नारी,
पेड़ों पर उछल कूद करते बालक नादान |
हरे भरे खेतों से लिपटी वसुधा की महिमा न्यारी,
कितना सुन्दर गाँवों का जीवन प्राणवान ||

हरी भरी भूमि पर चरती गैया प्यारी,
क्रीडा करते बच्चों से जीवंत खेल मैदान |
घर की दीवारों से आती गोबर की महक न्यारी,
गाँवों का जीवन ऐसा अद्भुत स्वर्गिक महान ||

1 comment:

  1. I have never been to a gaon...
    itni adbhut jhalak dikhane ke liye dhanyavaad ;)
    awesome.. \m/

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