न फिक्र, ना बंधन, ना परवाह किसी की करते थे
खोये थे अपने में ही, ना किसी की सुनते थे
सीखने की धुन थी लेकिन चिंता नहीं थी,
प्यार था हर एक के लिए, कोई नफरत दिल में नहीं थी ...
जब हम छोटे बच्चे थे...
वो कोई झगडे थे? जो दिन दो दिन में सुलझा करते थे
जिद्दी इतनी कि हर बात मनवाने को सबसे उलझा करते थे
रूठना और मनाना तो एक खेल जैसा था,
पाक साफ़ दिल दर्पण औ पानी जैसा था....
जब हम छोटे बच्चे थे...
दादी नानी के किस्से दिल को छू जाते थे
भूत प्रेत कहानी से कुछ ज्यादा हो जाते थे
नाज़ करते छोटी छोटी चीज़ों पर
इठलाते, सबको दिखलाते थे नए कपडे पहनकर...
जब हम छोटे बच्चे थे...
चाहकर भी जी ना पाएं उन अनमोल पलों को
समेट ना पाएं उन बिखरी यादों को
छूट गए वो पल जिनमे घुला था माधुर्य जीवन का
वक़्त कि ताकत बड़ी है, जोर कहाँ कुछ चलता मन का...
जब हम छोटे बच्चे थे...
मेरा बड़ा सा दोस्त बच्चा बन गया
ReplyDelete:)