Thursday, February 10, 2011

राही

राही चलता चल, राह बहुत लम्बी तेरी !
सुख -दुःख हँसना-रोना तो चलता रहता है,
ना हो इनसे मंद गति तेरी !!

पथ से भटकाने वाले तो बहुत हैं, गिने चुने ही सही राह दिखाते !
सही और गलत को पहचाने यदि तू , कट जाएगा मग हंसते हंसते !
मार्ग की बाधाएं कदम डिगायेंगी, वीर वही जो अडिग चलते जाते !
मजबूत इरादे, उच्च मनोबल और श्रम ही नौका पार लगाते !!
राही चलता चल...

हो सकता है पास दिखे लक्ष्य तुझे, लेकिन तुझे नहीं सुस्ताना है !
खरगोश चाहे बन किन्तु उसकी गलती को नहीं दोहराना है !
एकाग्र और अटल यदि लक्ष्य है तेरा, तुझको क्यों घबराना है !
एक बार वरण करो विजयश्री, फिर जीवन तो उत्सव का बहाना है !!
राही चलता चल...

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